संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश शासन ने जनपद संतकबीरनगर की एक नगर पालिका और सात नगर पंचायतों के लिए कुल 25 मनोनीत सभासदों की सूची जारी कर दी है। शासन की इस घोषणा के बाद जहां कई समर्थकों में खुशी की लहर है, वहीं मेंहदावल नगर पंचायत में पिछड़ा वर्ग (OBC) और वैश्य समाज का एक भी प्रतिनिधि शामिल न होने पर तीखा विरोध शुरू हो गया है।

सोशल मीडिया पर नाराजगी: "क्या वैश्य समाज केवल वोट बैंक है?"

​मेंहदावल नगर पंचायत में किए गए मनोनयन को लेकर वैश्य समाज ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं ने भाजपा के इस कदम पर सवाल उठाए हैं:

  • मनीष जायसवाल: "वैश्य समाज भाजपा का प्रमुख वोटर रहा है, लेकिन मेंहदावल में हमारी भागीदारी शून्य है।"
  • अधिवक्ता आलोक बर्नवाल: "भाजपा वैश्य समाज से केवल वोट लेती है और उसका कोई महत्व नहीं समझती।"
  • रजनीश प्रताप सिंह: "भाजपा को केवल व्यापारियों से वोट चाहिए, उनसे कोई मतलब नहीं है।"
  • अधिवक्ता रविशंकर रावत: "वैश्य समाज का प्रतिनिधित्व न होना एक गंभीर और चिंता का विषय है।"

निकाय वार मनोनीत सभासदों की पूरी सूची:

1. खलीलाबाद नगर पालिका:

  • ​ऊषा पांडेय
  • ​कन्हैया वर्मा
  • ​सत्यविंदर पाल सिंह जज्जी
  • ​सर्वजीत पासवान

2. नगर पंचायत मेंहदावल:

  • ​बीमा शुक्ला
  • ​सुशीला पाठक
  • ​अतुल सिंह

3. नगर पंचायत बाघनगर (बखिरा):

  • ​नवल किशोर त्रिपाठी
  • ​फूलमती जायसवाल
  • ​दिवाकर निषाद

4. नगर पंचायत मगहर:

  • ​सुनीता यादव
  • ​अरुण कुमार गुप्ता
  • ​गौरव निषाद

5. नगर पंचायत बेलहर कला:

  • ​प्रेमलता राय
  • ​हरि प्रसाद गोंड
  • ​महेंद्र निषाद

6. नगर पंचायत धर्मसिंहवा:

  • ​राजू पाण्डेय
  • ​रविन्द्र गौतम
  • ​चंद्रभान निषाद

7. नगर पंचायत हरिहरपुर:

  • ​समय देव पांडेय
  • ​विद्यावती श्रीवास्तव
  • ​पंकज कन्नौजिया

8. नगर पंचायत हैंसर बाजार (धनघटा):

  • ​लक्ष्मी नारायण दूबे
  • ​अशोक यादव
  • ​दिलीप अग्रहरि

सियासी गलियारों में हलचल

​विशेषज्ञों का मानना है कि शासन द्वारा जारी इस सूची में जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश तो की गई है, लेकिन मेंहदावल में पिछड़ा वर्ग और वैश्य समाज की अनदेखी भाजपा के लिए स्थानीय स्तर पर सिरदर्द बन सकती है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।